क्या कह रही हैं ये इनको जबरजस्ती ले चलो समय बहुत कम है तुम्हारी बेटी की जान को खतरा है तुमहे चलना पड़ेगा मेरे साथ चलोp जल्दी उनको उठाओ और भागो यहाँ से वो यहाँ आ न पाए चलो जल्दी चलो वीर सिंह कहते हैं और तीनो वहाँ से भागते हैं
सुरुचि धीरे धीरे चलती है परंतु अपनी बेटी के लिए न जाने उसे शक्ति कहाँ से आती है की वो अपने शरीर के दर्द को भूलकर उनके साथ चलने लगती है
सुरुचि कहती है की मै आ रही हु पीछे पीछे मुझे पकड़ो मत दम घुटता है
वीर सिंह आगे आगे चल रहे हैं वे पराई स्त्री को गोद मे नहीं उठा सकते उनके हाथों मे इतनी शक्ति अभी भी है की वे सुरुचि को गोद मे उठाकर चल सकते थे
इतने मे उन्हे लगता है की कोई उनके पीछे आ रहा है वे अब तेज तेज चलने लगते हैं हड़बड़ी मे वे सुरुचि को भूल जाते हैं और भागने लगते हैं
अब सुरुचि का शरीर जवाब देने लगता है उसका माथा बुखार और बीमारी से घूमने लगता है और वो एक पत्थर पर सिर रखकर बैठ जाती है क्रमशः

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