नन्ही अपने अमरूद और बेर लेकर अपने घर को जारही होती है रास्ते मे रज्जु मिल जाता है
आज तो नन्ही बहुत सुंदर लग रही थी उसे वो दूर से नन्ही को देखता हुआ आ रहा था नन्ही अपने फल लिए खुशी से भागती हुई अपने घर को जा रही थी
नन्ही अभी कच्ची कली थी, नादान अल्हड़, नासमझ अभी तो वो दुनिया को अच्छी तरह से नहीं जानती थी
रज्जु ने उसे रोका, और कहा नन्ही तुम कहाँ जा रही हो आज तुम बड़ी खुश हो
नन्ही ने कहा आज मुझे बहुत अच्छे फल मिले हैं बहुत मीठे हैं मैं अपने घर जा रही हु बाद मे बात करूँगी अभी मुझे जाने दो
रज्जु ने कहा की एक मुझे भी दे दो देखो मैने तुम्हे अच्छे अच्छे कपड़े दिये हैं चलो आओ उधर चलकर खाएं
नन्ही रुक जाती है और उसको देखने लगती है कहती है मै तुम्हे क्यो दूँ अपने फल
तुम्हारे कपड़े मै वापस कर दूँगी कल कपड़ो का ताना मारते हो और भागने लगती है
अच्छा अच्छा ठीक है तुम मेरे कपड़े वापस मत करना मै कल तुमहे मिठाई दूँगा आना जरूर,, रज्जु जोर से कहता है
मै तुमसे फल नहीं मांगूंगा अब
नन्ही कहाँ हाथ आने वाली थी वो कहती है की अच्छा मै कल आऊँगी तुम मै कल आऊँगी,,,, क्रमशः
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