कभी इस वस्तु की चाहत है
कभी उस वस्तु की चाहत है इसे
घायल भी हो जाता है कुछ पाने के लिए
फिर भी उलझता रहता है
फ़िकर्ता रहता है
बेकार की बैचैनी
बेकार बेकार की बाते अपने मे समेंट कर
बेवजह दुखी होता रहता है
जो हैं अभी उनकी परवाह न करता
जो नहीं हैं उनका ख्याल करता
लेकिन कभी कभी अचानक ज्ञान ध्यान मे मग्न होकर
अपने अंतर्मन को बहुत सिखा जाता
ये एक पागल मन ही तो है 🌹🌹🌹
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