सासू माँ के साथ पुरी मे बिताए गए कुछ पल

मैं अपनी अम्मा के साथ पुरी गई उड़ीसा

ट्रेन का सफर करके जनवरी मे सर्दी का समय था छोटे छोटे बच्चे थे

साथ मे अम्मा थी जो बहुत ही मजेदार और यादगार पल थे जो आप लोगो को मैं बताना चाहती हु

अपने यादगार पलो को किसी जगह बिखेर देना चाहती हु आप लोगो के साथ

ट्रेन का सफर था मैं साथ मे खाना बनाकर लाई थी

अम्मा ने भी पूरा सहयोग खाना बनाने मे किया था वो बता रही थी की क्या क्या बनाना चाहिए

वे धीरे धीरे जाकर एक कपड़े के झोले मे कुछ खाने पीने का सामान भी लाई थी जो उनका अपना था वे अपना सारा सामान अपने बैग मे रख रही थी और मुझसे कह रही थी की तुम बच्चो का सामान मुझे दे दो मैं उनको सजा दु

और बताती जा रही थी की ये चाहिए वो चाहिए

मैंने आलू उबाल लिए थे

बाबू जी बाजार से मिर्च और सब्जियां लाएँ थे

मेरे पति हल्दिराम की भुजिया और मिठाई लाये थे जो सबको पसंद था

मैंने बच्चो के खाने का सामान पहले से ही मंगा लिया था

हरी मिर्च को भरकर उसकी सब्ज़ी बना ली थी

मसालेदार नमक भी पीस लिया था सफर मे खाने के लिए

दोनों बच्चे लड़ रहे थे मुझसे की मैं ये पहनूँगा मैं वो पहनूँगा

अम्मा मुझसे कह रही थी की दुल्हिन् हल्की साडी पहनना तुम्हारे बच्चे बड़े छद्दरि हैं मैं उनसे बोली अम्मा मेरे पास एक नई सूती साड़ी है उसे आप पहनना सफर मे

अम्मा ने कहा ला दे मुझे मै उसे सफर मे क्यो खराब करूँगी पूजा करते समय पहनूँगी, समुद्र देवता की

मैंने भी अपनी साड़ियां उन्हे दिखाई उन्होंने मुझे एक साड़ी पहन कर जाने को कहा

सारा दिन खाना बनाने और त्यारी मे लग गया शाम हो चुकी थी मैंने सारा सामान पैक करके एक कोने मे रख दिया अम्मा मुझे याद दिला रही थी की दवा रखी,

मैंने कहा नहीं अम्मा, अब अम्मा को गुस्सा आ गया कहने लगी अरे पगली दवा ही तो सबसे जरूरी है रास्ते मे किसी की तबियत खराब हो गई तो क्या सबको पूडी सब्जी खिलाओगी और मै जल्दी से दवा का डब्बा उठा लाई और उसमे bacch

बच्चो की , अपनी दवा रख ली अगर उस समय अम्मा न याद दिलाती तो मै दवा भूल ही जाती Aab

आज भी मै पहले दवा रखती हु बाद मे खाना

अम्मा कूल केजी मे पानी भर रहीं थिं

अब हम सब कपड़े पहनकर तैयार हो गए बच्चे भी खूब चहक रहे थे, बाबू के पैर छुए बाबू ने आशीर्वाद दिया, शंकर जी के पैर छुए

अम्मा मुझे एक कोने मे ले गई और बोली की तमीज नहीं है तुम्हे पैर खाली छु रही हो तीर्थ पर जाते समय सबके पैर छूकर पैसे दिये जाते हैं मैंने अपनी पर्स निकाली और सबसे पहले अम्मा के पैर छुए और उनको पैसे दिये बाद मे मैंने चाचा चाची, जिठानी, सारे बच्चे sabko

पैसे दिये और सबके पैर छुए और hm

सब बाहर निकले तभी राजपति दीदी भी दौड़ती हुई आ गई वो किरायेदार थी गरीब थी , अम्मा ने इशारा किया की इसको भी पैसे देकर हाथ जोड़ दो मैंने वही किया जो अम्मा ने कहा अब एक टैक्सी की गई सब उसमे घुस गए , चलने ही वाली थी की अम्मा चिलाइं अरे पागलो पानी रखा की नहीं मेरे पति बोले अरे वो तो घर मे रह गया, तब आवाज लगाई अम्मा ने, अरे पानी छूट गवा है , बाबू जी दौड़कर पानी लाये

अब हम सभी स्टेशन पहुंचे गाड़ी आने मे एक घंटा बाकी था

अम्मा टिकट, पैसे अपने पास रखे थी किसी को मेरे ऊपर विश्वास नहीं था सब डरते थे मुझे देने मे

अब समय नहीं कट रहा था, जाने की जल्दी पड़ी थी बच्चे उछल रहे थे बार बार गाड़ी देखते थे तभी एक गाड़ी सीटी बजाती हुई आई, एक बच्चा बोला पापा सामान उठाओ गाड़ी आ गई अम्मा ने उसका हाथ पकड़ कर खींचते हुए बोली अरे ये मालगाड़ी है

इसमें माल जाता है

और अभी अपनी रेलगाड़ी आती होगी अभी

बहुत देर हैtabhi

तभी मेरे पति की नजर चाय वाले और समोसे वाले पर पड़ी वे दोनों बच्चो को बैठाकर समोसा लेने चले गए अब हम लोग समोसा खाने लगे, दोनों बच्चे अपनी छोटे छोटे हाथो मे समोसा लेकर खा रहे थे समोसे के आलू मे मिर्च थी तो छोटे बेटे ने कुत्ते को दे दिया अब kuttaee

कूत्ता समोसा खाकर हम लोगो के पीछे लग गया

ऐसे ही समय बीता रेलगाड़ी आ रही थी

अब सब लोग खुश हो गए रात भी हो चुकी थी सर्दी भी थी अम्मा ने कहा की सब अपना टोपा उतार कर बैग मे डाल दो वरना भीड़ मे खो जाएंगे अब ये हुआ गाड़ी रुकी हम सब एक दूसरे का हाथ पकड़े थे बच्चे अम्मा की धोती मे चिपके हुए थे

अब गाड़ी रुकी, मैंने कहा की पहले अम्मा को घुसाओ इसमें अब पहले पति चढ़े और अम्मा ट्रेन मे चढ़ रही थी बच्चे भी ट्रेन मे घुस गए और अम्मा को पकड़ रहे थे अम्मा को chad

चढ़ाना मुश्किल हो रहा था खैर अम्मा चढ़ गयीअब सामान भी चढ़ाया जाने लगा सामान भी चढ़ गयातभी एक आदमी

चिल्लाया, अभी अभी चाची ने मुझको छाती मे दो घूंसे मारे हैं ये किसके साथ हैं तभी अम्मा चिल्लाई की ऊपर चढ़े जा रहे हो तुम , काबू मे नहीं आ रहे थे तो क्या करू घूंसा मार दिया

अब मै हंसने लगी, पति देव बोले भैया बूढ़ी है क्या करूँ मेरी माता जी हैं माफ करो भाई

बात रफा दफा हो गई हम लोगो का रिजेर्वेशंन था सीटें भी अच्छी थी

हम लोग रात मे खाना खाकर, पूडी, आलू मसाला वाली, मिठाई, आदि

बच्चे, पति सब सो गए बिस्तर बिछाकर और मै भी सोने जा रही थी परंतु मै अम्मा को देख रही थी की वे नहीं सो रही थी रात मे अपनी बर्थ पर लेटी हुई थी आँखे खोले अब मै अम्मा को देखकर बोली अम्मा आप सो जाओ मैं जाग रही लेकिन अम्मा ने कहा मै नहीं sou

सोऊँगी तुम सो जाओ, और मै भी थोड़ी देर सो गई अब सुबह हुई बच्चे उठ गए mai

ऊपर वाली सीट पर थी छोटा बच्चा मेरे साथ सो रहा था मैं ऊपर वाली सीट पर इसलिए सोई की मेरे छोटे बच्चे को रात मे चलने की आदत थी पता लगा सब सो गए और वो कही रात मे भाग न जाए

सुबह होते ही बाथरूम और चाय पानी का सिलसिला शुरू हो गया पूरी आने वाला th

थोड़ी देर के बाद पुरी आ गया हम सब उतरे, एक औटो मे अपने गेस्ट हाउस पहुंचे, बिल्कुल समुद्र के पास था मैंने समुद्र पहली बार देखा था अम्मा की इच्छा हुई नहा धोकर पूजा करने की, और उन्होंने सबसे जल्दी नहाने को कहा अम्मा ने अपना lota

लोटा निकाला और पूजा का कुछ सामान निकाला और हम लोग समुद्र मे नहाने पहुंचे अम्मा ने खुद लोटे से मुझे नहलाया, बच्चो को भी नहलाया और हम फ़ोटू खिचवाने बैठे ये वही फ़ोटू है मेरी और अम्मा की 🌹🌹🌹🌹🌹❤❤❤ आज भी अम्मा मेरी यादों मे ji

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