किसी का दुःख अच्छा न लगे मुझे

पीड़ा होती है किसी का दुःख देखकर

अपना हंसना याद ही नहीं रहता

कुछ खो सी जाती हु

गुम हो जाती हु किसी ख्याल मे

ये सोंच कर उबल जाती हु

की सुख और दुख किसी के नहीं होते

न सुख के दिन रहते हैं और न दुख के दिन

इनका आना जाना लगा ही रहता है

ये कितनी अजीब अनुभूतियाँ हैं जो इंसान को अंदर से तोड़ कर रख देती है

क्या आनंद मनाऊं क्या अपनाऊँ, क्या यही जीवन है

यहाँ पर किसी का ठीक ही नहीं है

आज कोई है कोई लुप्त है

कोई चला जाता है हमेशा के लिए

सो जाता है अपनो को तड़पने के लिए एक गहरी निंद्रा मे

ख्व़ाब बन जाता है संग किसी का

पीड़ा देती है किसी को याद मन को

क्या यही जीवन है क्या यही जीवन की बेदी है 🌹🌹🌹🌹❤🌹🌹🌹🌹🌹🌹

टिप्पणी करे

Design a site like this with WordPress.com
प्रारंभ करें