सबकुछ कितना बदल गया है

वो गालियाँ जो मेरी नानी दिया करती थी अब सब भूल गए

वो प्यार वो दुलार अब कहाँ खो गया

ऐसा लगता है कि जमाना अब सो गया

महानगरों मे किसी को किसी से मतलब नहीं है

सब मतलबी हो गए हैं

किसी को एक गिलास पानी भी अमीर लोग ये सोंचकर पिलाते हैं की ये उनके काम का है की नहीं

वो सिर पर पल्लू सम्मान का ना जाने कहाँ खो गया

सब आधुनिकता की ओर बढ़ चले हैं

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