
अपने मन की बात मै दूसरों से नहीं बता सकती परंतु अपनी बात को मै अपनी wordprees मे लिख सकती हु
मेरी फीलिंग्स को आप लोगो से ज्यादा कोई नहीं समझ सकता
जब 21 feb को मेरी मांग मे सिंदूर भरा गया मेरे पति ने जब मेरे सिर पर हाथ रखा तो मुझे अहसास हुआ की अब मेरा भी कोई हो गया है मेरा भी सुहाग चढ़ गया, मै आज से सुहागन हो गई मै एक अंजान व्यक्ति के साथ जाने वाली हु, इनका स्वभाव नहीं जानती, इनके घर के सदस्यों को भी ठीक से नहीं पहचानती
क्या करूँगी अब, क्या होगा मेरे साथ
मै तो कुछ नहीं जानती अब सुहागरात मे मै क्या करूँगी
मारुँगि अब मै हिम्मत करती हुई सोंचने लगी की अब जो होगा निपटा जाएगा कमरे मे कौन देखता है अच्छी तरह इनको परेशान करूँगी मैं अब
मुझे देख कर सब बहुत हंस रहे थे ना अब क्या करूँगी वहाँ भी सब हँसेंगे
मुझे तो घूँघट निकालना पड़ेगा , मै तो पहले ज्यादा अच्छी थी अब जाना ही पड़ेगा बड़ी सी कार खड़ी है, सामान लादने की गाड़ी भी खड़ी है
अब मेरा रोना स्टार्ट हो जाता है मेरा घर अब पराया हुआ बाबुल का घर पराया हुआ, सारी सखियाँ छूटी
मै तो अब मेहमां हो गई
शरीर तो चला जाएगा पर आत्मा यही रह जाएगी
अब तो जाना ही है वचन नीभाना है 😔😔😔😔
लेकिन fir
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