अब तो सुरुचि पीछे ही रह जाती है तभी उसको खयाल आता है की अरे अरे आपकी पत्नी नहीं दिख रही
हाय अब मै क्या करूँ मै अब तुहारे साथ नहीं जाऊंगा मेरी तो पत्नी ही खो गई पता नहीं क्या होगा उसका अब
मै नहीं जाऊंगा अब, मै उसे खोजुगा पता नहीं वो किस हाल मे होगी नहीं नहीं
वीर सिंह अच्छी मुश्किल मे पड़ जाते हैं और वे भी सुरुचि को खोजने लगते हैं
तभी उनका आदमी वहाँ आता दिखता है और वो वही पर रुक जाता है कहता है भैया जी मुझे इनकी पत्नी पत्थर के पास गिरी मिली थी और सौम्य भी वही पर घूम रहे थे
मैने इनकी पत्नी को सौम्य सिंह के साथ भेज दिया वे अपने घोड़े मे बिठा कर बहन जी को ले गए वे बीमार थी आप चिंता न करो bhaiya जी क्रमशः

टिप्पणी करे