देवदासी भाग 482

तुम सच कहते हो तुम मुझे तुमपर विश्वास है

अच्छा अब हम चलते हैं चलो वहाँ पर अपना घोड़ा खड़ा है आप लोग घोड़े पर बैठ जाओ

मै किसी तरह आ जाऊंगा लेकिन संभल कर जाना

वीर सिंह और वो चलने लगते हैं एक होगा खड़ा होता है दोनों घोड़े मे बैठ जाते हैं

तभी सुरुचि का पति जोर जोर से खांसने लगता हैं

वीर सिंह देखते हैं की दो डाकू उनके पास आ रहे थे

लेकिन वीर सिंह तो डाकुओ की वर्दी मे होते हैं वीर सिंह को देखकर वो दोनों वही रुक जाते हैं और कहते हैं की इसे क्यु ले जा रहे हो सरदार के हुक्म के बिना

सरदार ने इसे मन्दिर आने को कहा है जहाँ डाका पड़ रहा है मुझसे सरदार ने ये काम करने को कहा वीर सिंह ने कहा

एक डाकू कहता है की ये तो हो ही नहीं सकता तुम इसे हमारे हवाले करो सरदार ने मुझसे और सब आदमियों से कहा है की जब वे यहाँ आकर हुक्म देंगे तभी इसे छोड़ दिया जाएगा लेकिन इसकी पत्नी कहाँ है वो भी तो साथ थी

वीर सिंह कहते हैं की ये मुझे नहीं पता वो तो अड्डे पर ही होगी

तुम झूठे हो तुम हमारे आदमी नहीं हो सकते कुछ गड़बड़ है, जरूर कुछ गड़बड़ हो रही है ये घोड़ा भी अपना नहीं है जरा इसके खुर तो दिखाओ इसकी पीठ पर भी हमारा कोई भी निशां नहीं है क्रमशः

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