कल्लू रिक्शा खोजने चले जाते हैं मौसी वहीँ पर बैठ कर बक्से से कुछ पैसा निकालकर रख लेती है और कुछ पूरी सब्जी और जलेबी ले आती है
कल्लू को बुलाती है कि वो भी कुछ खा ले
बिटिया के लिए दुध भी हलवाई की दुकान से आ जाता है
जयश्री को भी दुध पीला देती है
तभी वो देखती है कि सुधा की अम्मा चली आ रही है वो पोटली मे कुछ लिए हुए थी
सब खाने ही जा रहे थे उनको देखते ही सब उनसे भी खाने का आग्रह करने लगते हैं
सुधा की अम्मा कहती है कि ये लो बिटिया की अमानत
मौसी कहती हैं कि इसमे क्या है
देखती है तो कहती हैं कि इसमें तो पैसे और सोने चांदी की पायल हैं
सुधा की अम्मा कहती है कि ये बिटिया को उस दिन मिला था
मैं इसे अपने पास रखे हुए थी कि जब अवसर मिलेगा तब दे दूंगी
मौसी कहती हैं कि इसे आप रखो ये सब आपका है मंदिर आपका ही है बिटिया आपकी है आपने ही सबकुछ किया था इसलिए ये आपका ही हुआ
सुधा की अम्मा कहती हैं कि नहीं भगवान ने मुझे सब दिया है बिटिया का ये सब उपहार है ये उसी का है और मौसी को सौंप देती है। क्रमशः

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