सुकून उसी मे है जिसमे अपनी मेहनत हो
अक्सर मैने देखा है जी जो लोग मेहनत सही दिशा मे करते हैं वे जरूर सफल होते हैं
किसी की जमीन जायदाद जबरन लेकर उसमे राज्य करने की प्रवृर्ति कभी भी सुकून नहीं दे सकती
अपनी मेहनत पर ही हमें सुकून की नींद मिलती है और हमारे सारे काम भी उसी पैसे से बन जाते हैं समस्याओं का तो आना जाना लगा ही रहता है अपनी समस्याओं को भी हम आपकी मेहनत के दम पर सुलझा लेते हैं
लेकिन जब हम किसी की कोई भी चीज, छल, कपट या बिना मेहनत किये पाने की चेष्ठा करने लगते हैं अगर हम उसमे सफल भी हो जाते हैं हमे अनुभूति होती है एक क्षणिक सुख की तो वो सुख कुछ ही दिन का एक गुब्बारे की तरह रंग बिरंगा होकर हमारे सामने आकर हमे लुभाता है
परंतु हम ये नहीं समझ पाते की जो रंग बिरंगा गुब्बारा हमारे सामने उड़ रहा है वो एक हवा के झोंके मे कब फुट जाएगा और उसमे से कितनी भयानक दुख रूपी बदबूदार समस्या रूपी गैसे बाहर निकलेंगी और हमे न आराम से रहने, और एक नींद के लिए हम तरसते हैं, हमारा सुकून लुप्त हो जाएगा जिसे हम स्थाई समझ रहे थे

अपने सुकून को अगर जीवित रखना है तो हम अपनी मेहनत के बल पर अपना मुकाम हाँसिल करने का प्रयास करें क्योकि सच्चा सुकून ही हमारे जीवन का सुख है, थोड़ा ही हो पर अपनी मेहनत का हो अपनी मेहनत को अपना हमसफर बनाये
बड़ी लम्बी गुफ्तगू करनी है,
तुम आना एक पूरी ज़िंदगी ले कर,
सिकवे भी हैं तुमसे और,
किस्से भी हैं कुछ वही पुराने,
धड़कन भी कुछ शांत पड़ी है,
आ जाओ कभी तुम इसे चुराने,
आओ तो कुछ नयी बात बताएं,
कुछ किस्से तुमसे जुदाई के,
बाँटें थोड़ा सुकून भी,
तुमसे अपनी तन्हाई के,
तुम आना तो फुर्सत में आना,
जाने की हर ज़िद्द भुला कर,
शुरूआती दिनों में थी जो भी,
चेहरे पे वही ताज़गी ले कर,
बड़ी लम्बी गुफ्तगू करनी है,
तुम आना एक पूरी ज़िंदगी ले कर…
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