मैं झूठ क्यूँ बोलूंगा
मैं तो तुम्हारा ही आदमी हू मैं इसे ले जाने आया हू वीर सिंह ने कहा
अब नहीं ये नहीं हो सकता और सब झूठ है तुम्हारा इरादा ठीक नही
और एक घूंसा वीर सिंह को मार कर बोला की नहीं एसी ही बात है तुम्हारा मतलब कुछ और है
अब वीर सिंह तो मार झेल नही सकते
वो एक ठाकुर का खून वो किसी की मार झेल नही सकते उन्हें भी गुस्सा आ गया और उन्होंने भी उस आदमी की गर्दन पकड़ कर उसे गुस्से से एक तरफ गिरा दिया
अब वो आदमी भी जोर जोर से चिल्लाने लगा बचाओ बचा लो
उसकी अवाज कई लोग सुन कर रुक गए और सब लोग उसके ही आदमी थे
अब सारे आदमी रुक गए और वीर सिंह को मारने लगे
वीर सिंह तो पूरे वीर थे और उनके हाथो मे अभी बहुत शक्ति थी
तीन को तो उन्होंने अपने हाथों से उठा बाहर नीचे फेक दिया
लड़ाई झगड़ा बढ गया वीर सिंह तो बहुत ताकत वर थे क्रमशः

टिप्पणी करे