देवदासी भाग 485

अब वीर सिंह ने तीन आदमियों से अकेले टक्कर ली

60 साल की उम्र मे भी उनकी भुजाओं मे बहुत ही शक्ति थी

उन्होंने चार डाकुओं को गिराकर पहाड़ी के नीचे फेंक दिया अब उनका ही घोड़ा ले लिया तभी वीर सिंह का एक आदमी आता दिखाई पड़ा

वीर सिंह ने एक घोड़ा उसे भी दे दिया

और अब वे तीनों चलने लगे

उधर डाकुओं मे हड़कंप मच गया कि वो आदमी कहां गए

उधर सुरुचि को सौम्य सिंह ने कामिनी भाभी के घर पहुंचा दिया और कामिनी से बोले कि भाभी इनका ख्याल रखना ये बीमार है

सुरुचि को तो कोई होश था नहीं वो बीमारी से पीड़ित थी बेहोश थी

कामिनी ने उसे एक कमरे मे लिटा दिया और कहा कि गीता

इन्हें नहला देना और साफ कपड़े पहना देना

मैं बैद्य जी को खबर करती हू और वो वैध जी को बुलाने चली जाती है क्रमशः

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