अब वीर सिंह ने तीन आदमियों से अकेले टक्कर ली
60 साल की उम्र मे भी उनकी भुजाओं मे बहुत ही शक्ति थी
उन्होंने चार डाकुओं को गिराकर पहाड़ी के नीचे फेंक दिया अब उनका ही घोड़ा ले लिया तभी वीर सिंह का एक आदमी आता दिखाई पड़ा
वीर सिंह ने एक घोड़ा उसे भी दे दिया
और अब वे तीनों चलने लगे
उधर डाकुओं मे हड़कंप मच गया कि वो आदमी कहां गए
उधर सुरुचि को सौम्य सिंह ने कामिनी भाभी के घर पहुंचा दिया और कामिनी से बोले कि भाभी इनका ख्याल रखना ये बीमार है
सुरुचि को तो कोई होश था नहीं वो बीमारी से पीड़ित थी बेहोश थी
कामिनी ने उसे एक कमरे मे लिटा दिया और कहा कि गीता
इन्हें नहला देना और साफ कपड़े पहना देना
मैं बैद्य जी को खबर करती हू और वो वैध जी को बुलाने चली जाती है क्रमशः

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