शादी का असली मतलब भाग 261

अब तो रघु देखता है वो प्रीति की घमण्ड भरी आँखों को और देखता है की पलंग के नीचे एक गिलास रखा है

उसके नीचे एक प्लेट रखी हुई है वो प्रीति के दूसरे कमरे मे चले जाने के बाद प्लेट को और गिलास को उठाकर बेसिन मे रखने जाता है

वो गिलास को छुता है तो देखता है की उसमे कोल्ड ड्रिंक की खुशबू आ रही थी और प्लेट मे कुछ डाल्मोत् की खुशबू आ रही थी जैसे की किसी ने कुछ खाया था

लेकिन कौन खा सकता है प्रीति का कमरा था उसमे तो कोई आया ही नहीं था

प्रीति के सिवा उसमे कौन आ सकता है

अब रघु के पैर ठीक होने लगे हैं वो चल सकता है लेकिन दौड़ नहीं सकता शायद एक महीने के अंदर वो समान्य कार्य कर सकेगा काम पर जा सकेगा

वो समझ चुका था की अब प्रीति उससे ऊब चुकी है प्रीति मे अब वो बात और प्यार नहीं रहा

प्रीति को अपनी उन्नति का घमंड हो गया है वो उसे हेय नजर से देखने लगी थी क्रमशः

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