अब तो रघु देखता है वो प्रीति की घमण्ड भरी आँखों को और देखता है की पलंग के नीचे एक गिलास रखा है
उसके नीचे एक प्लेट रखी हुई है वो प्रीति के दूसरे कमरे मे चले जाने के बाद प्लेट को और गिलास को उठाकर बेसिन मे रखने जाता है
वो गिलास को छुता है तो देखता है की उसमे कोल्ड ड्रिंक की खुशबू आ रही थी और प्लेट मे कुछ डाल्मोत् की खुशबू आ रही थी जैसे की किसी ने कुछ खाया था
लेकिन कौन खा सकता है प्रीति का कमरा था उसमे तो कोई आया ही नहीं था
प्रीति के सिवा उसमे कौन आ सकता है
अब रघु के पैर ठीक होने लगे हैं वो चल सकता है लेकिन दौड़ नहीं सकता शायद एक महीने के अंदर वो समान्य कार्य कर सकेगा काम पर जा सकेगा
वो समझ चुका था की अब प्रीति उससे ऊब चुकी है प्रीति मे अब वो बात और प्यार नहीं रहा
प्रीति को अपनी उन्नति का घमंड हो गया है वो उसे हेय नजर से देखने लगी थी क्रमशः

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