एक बार,
बस एक बार,
कनखियों से देख मुस्करा दो,
हया का आँचल ओढ़,
बिखरे लटों को उंगलियों में उलझा दो,
एक बार,
बस एक बार।
उन रस्तों को,
चौराहों को,
मेरे होने का,
तुझे खोने का,
हर रोज सिलसिला दो,
एक बार,
बस एक बार।
मैं चलूँ और छुट न जाऊँ,
चलते पैरों को रोक कर,
मुझे पास आने का इत्तला दो,
एक बार,
बस एक बार।
🌹❤🌹
टिप्पणी करे