कितनी पीड़ा होती है जब जीवन मे परिवर्तन होता है कभी कभी मन विदीर्ण हो उठता है पीड़ा से
किसी को भी इस भ्रम मे नहीं रहना चाहिए की आज जो भी है सब वैसा ही रहेगा
मस्ती भरी और जीवन मे रौनक हमेशा नहीं रहती
जो महफ़िल आज सज रही है कल हो सकता है की उस महफ़िल मे सिर्फ आप ही रह जाएं एकदम अकेले
परंतु इस परिवर्तन से भी डरना नहीं बल्कि उसका सामना करने के लिए खुद को पहले से ही सजग हो जाना चाहिए
आज महफ़िल है योवन है
रस लेने वाले हैं
क्यों खोये हुए हो मुसाफिर
ये महफ़िल महफ़ूज नहीं
कल का क्या ठिकाना ये महफ़िल
आज सजी है कल वीरांन् हो जाए
यौवन भी बचेगा नहीं
और रस लेने वाले भी गुमनामी मे चले जाएं
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