जिंदगी की तपिश

रह लो जीवन के आगोश मे कुछ दिन

कुछ तो जी जी कर मरते है

कुछ कुछ मर मर कर जीते हैं

कभी ठंडक है

कभी पतझड़ मे भी कुछ झड़ झड़ कर फिर से नया रुख लेते है

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