देव दासी भाग 486

अब क्या था सौम्य सिंह वही पर बैठ गए और गीता से कहते हैं कि बुआ ये माँ बराबर है बड़ी मुसीबत में है इनका ध्यान रखना ये मंजू लता की माँ है

इनके पति वीर भैया के पास है वे भी आते होंगे अब मैं चलता हूं बहुत काम है

अब उधर वीर सिंह के दोनों बेटे अभय और रोहित वहां आते है और एक सोफ़े पर बैठ जाते है और सुरुचि को देखने लगते हैं

तभी गीता वहां आ जाती है और उन लोगों से कहती है कि चलो जाओ अभी

अभी चाची नहाने जा रही हैं

और एक बड़े से बर्तन मे पानी लेकर सुरुचि को नहाने के लिए कहती है

सुरुचि के शक्ति नहीं होती वो अपनी आंखे फिर से बंद कर लेती है

परंतु गीता बहुत जिद्दी स्वाभाव की नारी है

वो सुरुचि का हाथ पकड़ कर उसे उठाती है और कहती हैं कि तुम्हें नहाना पड़ेगा अभी वैध जी आते होंगे

क्रमशः

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