पुरूष की शादी हुई और सब लोग बहुत खुशियां बटोर रहें थे लेकिन इस बात का दुख था जब पत्नी और पति खुशियां रास न आ रही थीं
अब
तो ये लग रहा था की क्या विवाहित जोड़ा खुश नहीं है अपनी शादी से
जीवन एक और महत्वपूर्ण बात याद दिला रहा था और वो एक बात सोचना शुरू कर देता है
उसकी पत्नी उसके विचारों को भाप लेती और उसके चेहरे पर गौर करती हुई कुछ मुस्कुराती है
पति कुछ नहीं समझ पाया की ये मुस्करा क्यु रही
अब सुहागरात की बेला आती है दोनों कमरे मे आज अपने जीवन की शुरूआत करते है
लेकिन पति तो अपनी पत्नी को कुछ देनें के लिए लाया न ही उसने अपनी पत्नी से कुछ कहा
बस बोला की काम नहीं चलता है कमाई, न हो रही और माँ बाप ने इस गरीबी मे शादी कर दी तो
पत्नी ने कहा की इसमे कौन सी बात है
कोई बात नहीं मैं आपसे बहुत खुश और संतुष्ट हू आप मेरी चिंता न करो मैं खुशियां बांटने नही दुख भी बांटने आईं हू
चलो हम सब खाना खाते है और उसने प्यार मे ये पंक्तियाँ कहीं
👍
बेरंग दिनों में मिला एक अनजान यार,
मेरे जीवन को भर दिया उसका प्यार।
ना जाने कब हुई हमारी पहचान,
ख्यालों में हमेशा उसकी तरह यहाँ।
वह अजनबी दोस्त बन कर साथ चला,
दिल के दरिया में खो गया हर तला।
बे मतलब रिश्ता था, फिर भी ख़ूबसूरत,
प्यार की एक कहानी बनी ये बात।
हर मुसीबत में साथ खड़ा हुआ वो,
हंसते-हंसते हमारा दर्द जान गया वो।
अनजान राहों में भी मिला वो शख्स,
दिल के क़रीब आकर बन गया हमसफ़र।
ये कहानी अजनबी दोस्ती की रही,
जो अब दिल के दोस्त बन गई यही।❤️
अनजान राहों में मिला वो शख्स,
बे-मतलब रिश्ता निभाता रहा।
कब जान पहचान हो गई ख्यालों में,
ये ना आ पाया वो अजनबी दोस्त बन कर साथ निभाता रहा।
दिलों की बातों को समझता था वो,
बिना शब्दों के हमसफ़र बन जाता रहा।
दूर जब भी चला जाते थे हम,
मन की आहटों को सुनाता रहा।
वक्त की लहरों में भी अनोखा था वो,
हमारे साथ हर पल मुस्काता रहा।
बातें अनकही, ख्वाबों की गलियों में,
वो अपनी दुनिया में खो जाता रहा।
अनजान राहों में उसने बसा लिया था घर,
हमारे दिलों में वो आवाज बन गया।
ये दोस्ती की राहें जो मिल गईं उससे,
हमारी जिन्दगी वो संग बिताता रहा।❤️
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