देव दासी भाग 489

गीता हलवा सुरुचि के पास रखकर कहती है कि सारा का सारा खा लेना बहुत कमजोर हो गई हो दुध भी पी लेना

मैं अभी बाकी काम निपटाकर अभी आती हू

उधर सुरुचि हलवा मेज पर रख देती है और ज्योंही खाने के लिए हाथ बढ़ाती हैं त्यों ही मंदिर की घंटी बजती है

सुरुचि हलवा रख देती है और धीरे धीरे वो बाहर जाने लगती हैं तभी कामिनी आ जाती है और वो सुरुचि को देखकर बहुत खुश होती है और कहती है अरे तुम्हें होश आ गया

भगवान का लाखों लाखों धन्यावाद है

लेकिन अभी बाहर मत जाओ अभी तुम स्वस्थ नहीं हो

तुम अपने ही घर में हो बाहर नहीं हो जाओ और आराम करो जब तबीयत ठीक हो जाएगी तब ही बाहर निकलना

सुरुचि अंदर जाने लगती है और अपना मुह खोल लेती है अब उसे भूख भी लग गई थी वो हलवा खाने लगती है

क्रमश

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