मेरी दुविधा

मैं परेशान होकर

बैठी और कल तक

मेरा बेटा पढ़ने जाएगा और मैं उसके जाने से दुखी हू परंतु उसके भविष्य उज्जवल हो इससे मैं अपने सीने पर पत्थर रखकर यह सोच विचार कर लेती हू कि सारी माँ अपने बच्चों को पढ़ने और संघर्ष करने के लिए बहुत कुछ सहती है

तभी तो उसके बच्चे अपना भविष्य उज्जवल कर लेते है और अगर घर के सभी सदस्यों का सहयोग प्राप्त नहीं होगा तो बच्चा आगे कैसे बढ़ेगा

लेकिन मुझे शांति नहीं है कभी मैं अपने बच्चों के बिना नहीं रही इसीलिए मैं बहुत दुखी हू

पर मुझे बहुत खुशी भी है कि मेरा बेटा दिल्ली एक अच्छे हॉस्टल मे पढ़ने जा रहा है अपने भविष्य के लिए वो बहुत ही उत्साहित हैं और उसे खुशी है कि उसे कुछ करने का मौका मिला

मैं सोंच रही थी कि मैं उसके बिना कैसे रहूंगी लेकिन मुझे विश्वास है कि मेरा बेटा अपने जीवन की उत्तम दिशा की तरफ सफल होगा

सभी माताएँ अपने बच्चों को पढ़ने या नौकरी करने के लिए दूर दूर भेज देती हैं

मैंने अपने आसपास की बहुत सी महिलाओं को देखा है वे अपने बच्चों को नोकरी के लिए विदेश तक भेज देती हैं

एक तरह से देखा जाए तो बंगाल मे नौकरी की कमियां हैं लोग छोटा मोटा काम करने को मजबूर है पढ़े लिखे लोग भी शामिल हैं और उन्हें छोटी सी नौकरी भी बड़ी मुश्किल से मिलती है गरीबी से गुजारा होता है

😒

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