
लोग कहते है कि मरने के बाद ही आत्मा अतृप्त होती है लेकिन हम कहते है कि जीवन के दौर मे भी बहुत सी आत्माए अतृप्त है और हमेशा रहेंगी
उनके अंदर प्रतिशोध है
द्वेष है
अहंकार है
लालच है
मोह है
दूसरों को आहत करने की आदत है
अपशब्द प्रयोग करते हैं
मन मे जलन होती है किसी के सुख और उन्नति को देखकर
आलस्य कूट कूट कूट कर भरा है
बहुत जल्दी हार जाते हैं
तो यही सब आत्मा के अतृप्त होने का कारण है जीते जी
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