
किस्मत भी क्या चीज़ है
एक परिंदा पिंजरे मे आंसू बहाता
एक ऐसा भी दिन था जब वो खुले आसमान में उड़ता था जब वो नीचे देखता तो सारी धरती खूबसूरत और हरित दिखाई देती खुशी खुशी गाना गाता, दाना चुकता और बरसात में वो अपने पंखों को खोल देता और बरसात के ठंडे पानी का आनंद लेता उसके साथी भी खूब उससे बातें करते
सब एक साथ झुंड बनाकर दाना चुगते और पंख फैलाते, मस्ती करते
वो सब बड़े खूबसूरत सुनहरे पंखों वाले पंछी थे उनकी काली चोंच खूबसूरत लगती
एक दिन ना जाने क्या हुआ वे अपनी मस्ती मे दाना चुग रहे थे
दूर से देखने पर वो दाने बहुत ही लाजवाब लग रहे थे
सब पंछियों की खाने की इच्छा होने लगी वो अपनी इच्छा पर काबु ना रख सके उन्होंने आगे पीछे कुछ ना सोंचा की ये दाने कैसे है और जब वो दाना खाने लगे तभी उनका पैर एक जाल में फंस गया
वो सब समझ नहीं पाते और कुछ करने जाते तभी एक बहेलिया कुछ पिंजरे लिए था और वह उन पिंजरों मे उन पंछियों को पकड़ कर डालता रहा
सारे दोस्त अलग हो गए
वे रो रहे थे पर उनका रोना कौन देखता सब बहुत पछताने लगे पर अब क्या हो सकता था
वो पिंजरे टांग कर खुशी से गाना गाते हुए झूमने लगा और कहने लगा कि आज मैं मालामाल हो जाऊँगा ये पंछी बहुत ही सुंदर है
और रास्ते मे जाने लागा
कुछ आदमी वहां से निकलने लगे उन्होंने पंछियों को मुंहमांगा दामों मे खरीद लिया
सब पंछी बिछुड़ गए वो दूर से अपने मित्रों को बेबस होकर देखते रहे और रोते रहे
और एक पंछी एक वेश्यालय मे खरीद लिया गया अब वो वहां पर एक दरवाजे पर टांग दिया गया
एक लड़की उसे रोज खाने को अच्छी अच्छी चीजे देती पिंजरा भी बड़ा था
वो पंछी उस लड़की को देखता था और कुछ कहता पर पर वो उसकी बात न समझती वो उसके पिंजरे मे पानी रख देती एक झूला भी लगा था उसमे वो रोज झूला झूलता
एक दिन उसने देखा कि एक आदमी लड़खड़ाते हुए आया और उस लड़की का हाथ पकड़ कर उसे एक कमरे मे ले जाने लगा लड़की रोने लगी लेकिन उसने उस लड़की को गोद में उठा लिया और जबरदस्ती कमरे मे ले जाकर दरवाजा बंद कर लिया
सुबह उसने देखा तो वो आदमी निकल रहा था और वह लड़की रो रही थी
पंछी को बहुत दुख हुआ वो समझ रहा था लेकिन वो क्या कर सकता था
लेकिन धीरे धीरे पंछी उस लड़की की बात समझने लगा दोनों की खूब दोस्ती हो गई थी वो पंछी इतना सुंदर था कि सब लोग उसे देखकर ही वहां आते वो पंछी बहुत ही भाग्यविधाता था उन सबका
एक दिन उस लड़की ने पंछी से कहा कि तुम पिंजरे मे कैद हो तुम्हें अच्छा लगता है पंछी ने कहा कि मुझे तुमसे प्यार हो गया है और अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता
मुझे इश्क हो गया है तुमसे
लड़की ने हंसकर कहा कि ये तुमने कहाँ सीख लिया कौन ये बात बोला
पंछी ने कहा कि तुम मुझे खोल दो फिर बताऊँगा
तो क्या तुम मुझे छोड़ कर चले जाओगे एक तुम ही तो हो जो मुझे प्यार करते हो
पंछी ने कहा कि जब हम प्यार करते हैं तो एक साथ रहेंगे जिएंगे मरेंगे आजाद होकर
लड़की ने कहा अच्छा और हंसने लगी आजकल बहुत सीख गए हों यहां से
ठीक है मैं तुझे कल खोल दूंगी चुपके से तू जाता है तो जा
पंछी ने कहा कि खोल दो मुझे आज़ाद कर दो
और रात के अंधेरे मे जब वो खोलने गई तो देखती है कि वो परिंदा रो रहा था
कह रहा था कि अब मैं रात को कहा जाऊँगा
लड़की ने कहा कि खुला आसमान है कहीं भी जा
और उसका पिंजरा खोल दिया
पंछी उड़ गया लड़की रोने लगी और परिंदे को दूर से जाता देखती रही
रात भर वो उसे याद करती रही सुबह वो उसके खाली पिंजरे मे खाना देने आई तो फिर से उसे उस परिंदे की याद आई
उसके मुह से निकला कि इश्क हो या परिंदा किस्मत में होगा तो लौट आएगा नहीं चला जाएगा आजाद कर दिया मैंने
लेकिन ये क्या यहां पुलिस क्यों आई है और पुलिस वाले छापा मार रहे है सब लोगों को पकड़ कर गाड़ी मे बंद कर रहे थे
लड़की वहां से भागने लगी और एक छोटे से घर मे घुस गई थोड़ी देर के बाद पुलिस सबको पकड़ कर ले गई
उस छोटे से घर मे एक पुरुष अपने बच्चे को लेकर बैठा था
लड़की ने पुरुष से कहा कि क्या मुझे आपके घर मे जगह मिलेगी कुछ देर के लिए
हा क्यु नहीं रहो यहां पर
तभी पुलिस उस घर मे भी आ गई और कहने लगे कि यहां पर एक वेश्यालय कि वेश्या छिपी हुई है
हमारे हवाले करो उसे
वो पुरुष जल्दी से अंदर गया और उसकी मांग ने सिंदूर कर पुलिस वालों से बोला साहब ये मेरी बीवी है
पुलिस वापस चली गई
लड़की ने कहा कि आपने एसा क्यु किया तो पुरुष ने कहा कि मैं तुमसे इश्क हुआ है मैंने तुमसे शादी कर ली अब तुम मेरी पत्नी और मेरे बच्चे की मां हो
लड़की ने उस पुरुष के चरण स्पर्श करे और कहा कि आपने मुझे उस नर्क से मुक्त किया
और वो बच्चे को गोद मे लेकर वहीँ पर सो गई
सुबह उठी तो अपनी छत पर देखती है कि वही परिंदा बैठा हुआ था और उसे बड़ी बड़ी आँखों से देख रहा था कह रहा था मुझे इश्क हुआ है
तभी उसका पति वहां आया और बोला कि अरे ये परिंदा तो आता है छत पर कल भी आया था जाओ इसे खाने को लाओ
अब वो परिंदा वहीँ छत पर रहने लगा। कहानी समाप्त
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