प्रेम की परिभाषा

प्रेम किसी चौराहे का चाट या
सीसीडी की कॉफी का मोहताज नहीं,
प्रेम तो सालों साल से चलती आ रही
सूरज और चंदा की भांति अडिग है।
यह दिल से दिल का मिलन है
इसको इजहार करने के लिए
किसी गुलाब या चॉकलेट की जरूरत नहीं
बस एहसास ही काफी है एक – दूजे के लिए,
यह कोई उपलब्धि नहीं, यह तो जीवन का सार है
फिर क्या यह कोई एक दिन का मोहताज है

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