जो गया वो तुम्हारा था ही नहीं
जिसको जाना है वो तुम्हारा कैसे हुआ
रोना किस बात का
ये शरीर तो एक ऊर्जा है बस
इसे चलाने के लिए एक ढ़ांचा प्रदान किया है
रोना किस बात का
एक दिन तो ये शरीर पांच तत्वों मे विलीन हो जाएगा
जो मिला भोग करो
जो आसानी से ना मिले उसे त्याग दो
टिप्पणी करे