वासना के भूखे इंसान का अंत जो दिल को छू गया

कमजोरी थी उसकी

बड़ी पुरानी आदत थी

हवाले किया गया उसे पुलिस के

पूछा गया कि ये क्यूँ करते थे

उसने कहा कि एक दरिन्दा नहीं हू मैं इज़्ज़त नहीं लूटता किसी की

किसी की मर्जी से खरीदता हू

किसी को

मैं वो नहीं जो आप मुझे समझ रहे हो

मैं उन महिलाओ को एक रात आराम की देता हू वो रात तारों भरी, प्यार भरी, विश्राम से भरी

जो रात के अंधेरे मे उन महिलाओं को बेदर्दी से नोचने के लिए खरीदते हैं उन्हें एक रात के लिए बचा लेता हू

उनके साथ रहता हू प्यार के कुछ पल इन्हें देता हू

हा मैं एक वासना का भूखा ही सही पर वासना एक जैसी नहीं होती साहब

मुझे प्यार चाहिए उन्हें भी प्यार चाहिए

और पुलिस वालों की आँखों मे आंसू भर गए तभी एक पुलिसकर्मी बोला कि साहब ये नाटक कर रहा है

उन लोगों से पुंछ लो

एक को वहां गवाह बनाकर लाया जाता है वो महिला सभी के सामने कहती है कि साहब ये वो मर्द है जिसे हम लोगों को पीड़ा से मुक्ति दिलाता है एक रात के लिए, ये हम लोगों के पैर दबाता है हमारे आंसू पोंछ कर हमें पैसे देता है

हमे एसे मर्दों की बहुत जरूरत है

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