
बीमार सुरुचि अब कुछ हलवा खाकर चादर ओढ़ कर लेट जाती है
अब वो कुछ राहत महसूस कर रहीं थीं
पता नहीं कैसे उसे नींद आ गई और वो एकदम सो गई थी
तभी गीता वहां पर आती है और वो देखती है कि हलवा और दुध का बर्तन खाली पड़ा है शायद इसने सारा का सारा खा लिया है वो बहुत राहत महसूस करती है सौम्य सिंह ने कहा था कि इनका ध्यान रखना उसे सोते हुए देखकर गीता उसके ऊपर एक चादर ओढ़ा देती है और बर्तन लेकर बाहर चली जाती है
अनायास ही गीता के मुह से निकल पड़ता है कि शायद इससे मैं मिल चुकी हू पर कहाँ मिली कुछ याद नहीं आ रहा
ये कौन हो सकती है तभी कामिनी आ जाती है और गीता से उसके बारे मे पूछती है गीता उसे बता देती है कि अब वो ठीक हो रही है
क्रमशः
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