देव दासी भाग 494

उधर सुरुचि के पास कामिनी आती हैं और खुद उसके हालचाल पूछती है उनके दोनों बेटे अभय और रोहित आते है

वे दोनों अपनी बड़ी बड़ी आखों से सुरुचि को देखते हैं

कामिनी सुरुचि को आराम करने के लिए कहती हैं और चली जाती है

दोनों बेटे वहीँ पर खड़े होकर सुरुचि को देखते है सुरुचि भी उन दोनों को गौर से देखती है

आखिर मे सुरुचि से अभय बात करने लगता है पूछता है कि वो कहाँ से आई हैं

सुरुचि कहती हैं कि बेटा मुझे कुछ नहीं पता मैं कहाँ से आई हू

रोहित कहता है चाची आप आराम करो हम जाते हैं थोड़ी देर मे आएंगे माँ गुस्सा होंगी अगर आपकी तबीयत खराब हो गई तो

तभी गीता आती है और कहती है कि अच्छा तुम दोनों यहां हो चलो आज स्कूल नहीं जाना क्या गाड़ी आती होगी माँ बुला रही हैं

आते है आप चलो और बुआ मेरे लिए आज क्या बनाया है

आज तो हलवा बना है सभी के लिए

आप अभी स्कूल के लिए बना दूंगी चलो जल्दी करो और दोनों का हाथ पकड़ कर खींच ले जाती है क्रमशः

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