देव दासी भाग 495

रोहित और अभय के जाते ही सुरुचि अपनी आंखे फिर से बंद कर लेती है

उधर सौम्य के घर वीर सिंह पहुंचते है उसे लेकर परंतु सौम्य भी नहीं मिलते हैं वे वही पर छोड़ कर वहा से जाने लगते है परंतु उनका सेवक वीर सिंह से कहता है कि आप थोड़ी देर रुकिए भैया आते ही होंगे

पता नहीं कहाँ गए है

वीर सिंह कहते हैं कि मैं अभी घर जा रहा हूं सौम्य सिंह आए तो बता देना कि मैं घर गया हू मुझे जरूरी काम है मैं गाड़ी और कुछ सामान लेने जा रहा हूं

वो भी कुछ आदमी और गाड़ी लेकर घर आ जाए

कह देना की वीर भैया ने बुलाया है अगर वो नहीं आ पाता है तो मैं खुद ही आऊंगा समय बहुत कम है और बहुत काम है

वीर सिंह वहां से चले जाते हैं

वीर सिंह जब अपने घर आते है तब

कामिनी उन्हें बताती है कि वो लाली कि माँ को यहां छोड़ कर चले गए हैं

वीर सिंह कहते है कि सौम्य ने बहुत ही अछा कार्य किया अभी मैं लाली कि माँ को खोजने चला जाता। क्रमशः

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