नकारात्मकता कैसे आती है

जब हम ज़रूरत से अधिक सामान खरीद लेते हैं घर और अपनी अलमारियों को सामान से भरे रखते हैं
कुछ लोग जरूरत से ज्यादा सम्पत्तियों को खरीद लेते हैं अगर एक घर की ज़रूरत है तो चार घर खरीद लिये अब जब एक घर होता है तो उसकी देखरेख सुरक्षा आराम से हो जाती है मगर इतना कुछ खरीद लेने के बाद उनके अन्दर तरह तरह की उलझन शुरु हो जाती है कि अब ये घर किसके नाम करूं कहाँ रहूं
बेचकर इसका पैसा क्या करूं, उनके नये नए शत्रु उत्पन्न हो जाते है अब उन्हें डर लगा रहता है कि कोई मेरे घरों मे कब्जा ना कर ले
जरूरत से ज्यादा सोना इकट्टा कर लेते हैं अब चिंता ये हो गई कि इन्हें कोई चुरा ना ले रात में नींद भी नहीं आती इन्हें, बाद मे इनके बच्चे या और कोई इनका गलत उपयोग करना शुरू कर देते हैं

जरूरत से अधिक कोई भी वस्तु ना खरीदे

बहुत अधिक धन संचय ना करें

खाना सोंच समझ कर खाए

किसी की निंदा ना करें

किसी से अपनी तुलना ना करें

दिखावे से दूर रहे

अपने रहने की जगह को साफ़ रखे

साफ कपड़े पहने

शरीर को साफ़ रखें

बीमार होने पर अपना इलाज कराते रहे

घर के आसपास या छत पर पेंड लगाये

भूखे पंछियों को खाने को दें

पेड़ों की सेवा करें

अपने बुजुर्गों और बच्चों का खासतौर से ध्यान रखें

किसी से नाहक उलझे ना

अपने वाहनों को रोज साफ़ करें

अगर मेरी बात अच्छी लगे तो आजमाए

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