बिक रही एक लड़की की दास्तान

सुंदर सी लड़की साधारण सी

कहती है कि बिक रही हू मैं बाजार मे

धो लो बहती गंगा मे हाथ

मैं बिक रही हू

मेरी किस्मत यही है

मेरी सीमा यही है

दर्द सहस्र सहकर लोगों को सुख देने के लिए

उनके ग़म भुलाने के लिए

किसी के ज़ख्म मिटाने के लिए

नसीब है मेरा यही

ज़मीर भी मेरा यही

कुछ पैसे लेकर किसी की जिस्म की आग बुझाने के लिए और अपने पेट के भूख की आग मिटाने के लिए मैं बाजारों में खड़ी हू

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