
एक पति अपनी पत्नी से कहता है कि तुम मुझे पसंद नहीं हो तुम मेरे लायक नहीं हो मेरी शादी गलत हो गई
वो पत्नी मजबूर थी बेबस थी
वो क्या करती गरीब थी
बाप पियक्कड़
माँ बेबस थी
दूर घर
ससुराल के अन्य लोग भी उसे प्रताड़ित करते
बात बात पर उलाहना
बात बात पर झगड़ा
वो सहती
विरोध करती भी तो वो अकेली होने के कारण दोषी बन जाती
सब उसकी बेबसी का फायदा उठाते
लेकिन वो अंदर से कितनी मजबूत हो रही थी शायद ये कोई नहीं जानता था
एक दिन ऐसा आया कि वो बिल्कुल ही कठोर हो चली थी
किसी की बात को ध्यान नहीं देती वो चुप रहती
लेकिन जब वो बोलती तो एसी बात की सब तिलमिला कर रह जाते
वो इतनी मजबूत हो गई थी कि
सभी की बातों को नज़रंदाज करती
पति को भी कुछ ना समझती एक दिन उसने सबसे लड़ाई-झगड़े शुरू कर दिए
कोई भी उससे जीत ना पाता
पति को भी प्यार ना करती
सारा प्यार खत्म होने लगा
अपनी किसी भी कमी को वो पूरा कर ही लेती
सभी की बात को हवा मे उड़ाने लगी
बेटियों को भी न बुलाती
इतनी कठोर हो चुकी थी वो चहारदीवारी मे बैठ कर सारा दिन रोने वाली बहु
अब उससे उम्मीद करने से क्या लाभ
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