बेहतरीन पाने की चाह मे हम अपने सामने अमूल्य वस्तु का परित्याग करते हैं

हमारे पास बहुत सी बहुमूल्य वस्तुएं, लोग मिली है परंतु हम अपनी अज्ञानतावश अपनी अनमोल वस्तुओं को पहचान नहीं पाते हैं और कुछ और वस्तुओं की मांग करते हुए उनकी तरफ आकर्षित होते हैं और भागते है कुछ दिनों बाद हमे पता चलता है कि सबसे अनमोल उपहार तो हमारे पास पर्याप्त था

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