खुशनुमा सफर

संभलकर चलने से समझदारी और सूझ बूझ से हमारा जीवन बहुत कुछ आगे बढ़ सकता है

अपने खानपान मे नियंत्रण रखने से

दिखावटी पन् से दूर

अपने समाज के नियमो का पालन करने वाले व्यक्ति का जीवन खुशनुमा हो सकता है

आध्यात्मिक विचार और सात्विक भोजन से, ज्यादा की चाह ना करके

इच्छाओं को काबु मे रखकर

आलस्य का जीवन त्याग कर

ज्ञान के मार्ग पर चलकर और न्याय के मार्ग पर चलकर हमारा जीवन खुशहाल हो सकता है

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