कानपुर मे मेरे घर के पास एक कब्रिस्तान है जो पहले मेरी छत पर से पूरा दिखाई देता था
मैं अक्सर रोज शाम को छत पर जाकर उस कब्रिस्तान को ध्यान से देखती थी उस समय मेरी उम्र 14 साल की थी
एक दिन मैंने देखा कि एक छोटा सा बच्चा जो मर गया था
उसका अंतिम संस्कार करने के लिये सिर्फ एक लड़की आई जो सलवार कुर्ता पहने थी उसके साथ तीन आदमी भी थे
वो गड्ढा खोद रहे थे वो लड़की कुछ दूर पर बैठी जोर जोर से उसे चिपका कर अपनी छाती से बहुत रो रही थी
मैंने उस लड़की को गौर से देख लिया
वो लड़की कुछ जानी पहचानी लग रही थी
मैं नीचे गई तो वहां से अपने भैया को बुला कर ले आई उनसे कहा भैया यहां पर इस लड़की का क्या काम वो अपने बच्चे को किस तरह गोद मे लेकर रो रही थी
फिर मैं और मेरा भाई छत पर फिर से गए
वहां देखा कि वो सुनसान से कब्रिस्तान मे वो लोग जबरदस्ती उसके हाथ से बच्चे को छीन रहे थे और हमने सुना कि वो बच्चा भी रो रहा था
और वो लोग उसे वही पर गाड़ कर चले गए और उस लड़की मारने भी लगे अब तो मुझसे रहा नहीं गया मैंने कहा भैया ये तो ठीक नहीं है गलत है
वो लोग वहां से जा चुके थे जब तब हम लोग वहा पहुंचते हमारे साथ मुहल्ले के लोग भी आ चुके थे
उन लोगों ने मुझसे घर जाने को कहा मैं अपने घर चली गई और छत पर माजरा देखने लगी
वहां पर पुलिस भी आई थी
गड्ढा फिर से खुदाई की गई धीरे धीरे
उसमे से देखा गया कि वो बच्चा जिंदा था
अब पुलिस उसे एक कपड़े मे लपेट कर ले गई
घर में भैया और मामा ने बताया कि वो बच्चा जिंदा था पुलिस उसे अस्पताल ले गई है
अब पता लगाएगी की ये कौन कर गया था
उसे सजा मिलेगी
कुछ दिनों बाद खबर मिली थी कि वो एक गरीब लड़की का बच्चा था उसके साथ रेप हुआ था
जब बच्चा पेट मे बड़ा हो गया तब सबको पता चाला घर मे ही बच्चे का जन्म हुआ
सामाज के डर से वो लोग उसे बेहोश करके जल्दी में गाड़ कर चले गए थे सबको पकडा गया सजा मिली
टिप्पणी करे