
जीवन की पतवार है
कभी डगमगा कर चलती है
कभी भंवर में फंसती है
कभी शांत हो जाती है
कभी शांति भंग करती है
जिंदगी की नाव
कभी धूप मे
कभी छाव मे
इसी तरह चलती है
जो डर गए वो डूब गए
जो सम्भाल गए वो पार लग गए
कभी धूप में चलती है

जीवन की पतवार है
कभी डगमगा कर चलती है
कभी भंवर में फंसती है
कभी शांत हो जाती है
कभी शांति भंग करती है
जिंदगी की नाव
कभी धूप मे
कभी छाव मे
इसी तरह चलती है
जो डर गए वो डूब गए
जो सम्भाल गए वो पार लग गए
कभी धूप में चलती है
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