अनकही बातें

ट्रेन मे एक परिवार सफर कर रहा था एक लड़की दूर बैठी अपने स्वप्निल जीवन की कल्पना मे खोई हुई थी

उसकी जॉब लग चुकी थी जॉब के बाद वो पहली बार अपने घर आई थी और वो वापस बंगलुरु जा रही थी

उस परिवार मे एक लड़के ने उस लड़की को देखा वो भी बंगलुरु मे जॉब करता था

दोनों ने एक दूसरे को देखा लड़की परिवार से घुल मिल गई लड़के के परिवार वाले बंगलुरु मे रहते थे अच्छी फॅमिली थी

उन्हें लड़की भा गई लड़की लड़के मे प्रेम हो चला था

फोन मे लड़की के परिवार से बात भी हो गई थी

दोनों हाथ पकड़े एक दूसरे का बैठे हुए थे

खाने के लिए उन लोगों ने कुछ खरीदा पानी खरीदा और सब खाने बैठ गए

कोई पूछा कि ये लड़की कौन है तो सब बोले मेरी बहू है

लगता ही नहीं था कि वो लड़की अनजान है

रात हुई

लड़की आंध्र प्रदेश मे रहने वाली थी

दोनों कुछ बोलना चाहते थे पर कुछ बोल ना सके

अचानक रात के अंधेरे मे जोर की अवाज धमाके के साथ

चारो तरफ चीख पुकार

अफरा-तफरी के बीच भी दोनों एक दूसरे के हाथों को थामे हुए

बिछुड़ गए

ढूंढते रहे, बिलखते रहे

अपने परिजनों को

क्या वो कौन सी घड़ी थी

सुबह देखा तो उसकी महबूबा चादर मे लिपटी मृतक के बीच में पड़ी थी एक सफेद चादर मे लिपटी हुई

परिजनों मे पिता का साया उठा माँ घायल, भाई और बहन का कुछ पता नहीं

वो कौन सी अनकही बात थी जो वो किसी से कह ना सका

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