मौसी रिक्शे मे बैठ जाती है और रिक्शा आगे बढ़ जाता है
उधर कल्लू भी अपने घर चले जाते हैं और काम मे लग जाते हैं
अब एक दिन कल्लू अर्जुन के घर जाते है हालचाल लेने के लिए की क्या हाल है घर मे
कल्लू जाते है तो क्या देखते है कि
अर्जुन के घर मे दोपहर का समय था
तो देखते है कि शैल और उसकी सहेलियों के खूब ठहाके लग रहे हैं पकौड़े बने है चाय का सिलसिला चल रहा है
और मुन्नू भी बैठा हुआ है वो भी शैल से सट कर
कल्लू को देखते ही सभी के होश उड़ जाते हैं
शैल कहती है कि अरे कल्लू तुम कब आए यहां बता दिया होता हमे
कल्लू कहते हैं कि अगर बताया होता तो ये मुन्नू कहा से मिलते और ये सहेलियाँ भी कहा से मिलती
खूब चाय नाश्ता हो रहा है इतना पैसा कहाँ से आ रहा है अब
पहले तो कुछ भी नहीं था तुम्हारे पास हम वो छोटी बच्ची थी यहां
शैल कहती हैं कि मुन्नू ने दिए है पैसे
मुन्नू क्यों देंगे पैसे लेकिन मुन्नू कहा से लाय पैसे क्या पापा की जेब काटी है तुम्हारे लिए
अच्छा मैं दादा से जाकर पूछता हू की मुन्नू इतने पैसे कहा से लाए जो इतनी दावत उड़ रही है
शैल कहती हैं कि अपनी औकात मत भूलो कल्लू तुम
तुम्हें याद नहीं है क्या की आज तुम इतना खुश हो मेरी बदौलत
तुम्हें नौकरी मेरी सहेली ने दिलाई थी नहीं यों आज सड़क की ठोकरे खाते तुम और अपने गाँव लौट जाते कब के
होश मे बात करो
कल्लू कहते हैं कि जो दुर्गति तुम्हारे कारण उन लोगों की हुई उसकी जिम्मेदार तुम हो क्या किसी को कष्ट देकर तुम सुखी रह सकती हो
भगवान सबका न्याय करते हैं एक दिन उन सबको भी न्याय मिलेगा क्रमशः

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