भागते हुए दीपेन्द्र थक चुका था तभी उसे एक निर्जन स्थान दिखाई देता है वो निर्जन स्थान जिसकी उसे बहुत पहले से तलाश थी
वो एक कब्रिस्तान था
उसमे सब शांत पड़े हुए थे
सिर्फ झींगुर की आवाज
पत्तियों की आवाज
चिडियों की आवाज भी थी
कुत्ते भी वहां पर थे
वो एक कब्र पर बैठ गया
तभी वहा पर एक अजीब सा आदमी आ गया
वो हाथ मे एक डंडा लिए था
वो दीपेन्द्र से बोला तू कौन है
दीपेन्द्र ने कहा कि मैं एक मुसाफ़िर हू
आदमी बोला ये जीवित लोगों की जगह नहीं है यहां मुर्दे रहते हैं
थोड़ी देर के बाद मै भी चला जाऊँगा
यहां तुम्हारा रहना ठीक नहीं है यहां पर एक रूह का वास है वो रात में आती है
वो बहुत शांत है उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया
लेकिन उसे किसी का यहां रहना पसंद नहीं है तुम यहां से चले जाओ अब रात भी होने वाली है। क्रमशः

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