आहत भाग 168

भागते हुए दीपेन्द्र थक चुका था तभी उसे एक निर्जन स्थान दिखाई देता है वो निर्जन स्थान जिसकी उसे बहुत पहले से तलाश थी

वो एक कब्रिस्तान था

उसमे सब शांत पड़े हुए थे

सिर्फ झींगुर की आवाज

पत्तियों की आवाज

चिडियों की आवाज भी थी

कुत्ते भी वहां पर थे

वो एक कब्र पर बैठ गया

तभी वहा पर एक अजीब सा आदमी आ गया

वो हाथ मे एक डंडा लिए था

वो दीपेन्द्र से बोला तू कौन है

दीपेन्द्र ने कहा कि मैं एक मुसाफ़िर हू

आदमी बोला ये जीवित लोगों की जगह नहीं है यहां मुर्दे रहते हैं

थोड़ी देर के बाद मै भी चला जाऊँगा

यहां तुम्हारा रहना ठीक नहीं है यहां पर एक रूह का वास है वो रात में आती है

वो बहुत शांत है उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया

लेकिन उसे किसी का यहां रहना पसंद नहीं है तुम यहां से चले जाओ अब रात भी होने वाली है। क्रमशः

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