वैध जी जब सुरुचि से अपनी जीभ दिखाने को कहते हैं तो सुरुचि इंकार कर देती है
आंखे दिखाने को भी मना कर देती है
वैध जी कामिनी से कहते है कि मैं महिलाओं को अपनी बहन और माँ समान मानता हू और ये मुझे क्या समझ रही हैं
कामिनी कहती है कि वैध जी आप हाथ देखकर इसे दवाईयां दे दो ये आपसे डरती हैं
वैध जी कहते हैं कि मैं देखूँगा भी नहीं अब इसे इसने तो मेरा अपमान कर दिया
कामिनी कहती हैं कि आप इसे माफ़ कर दो ये नादान है आपको जानती नहीं है वैध जी
और वैध जी को अपने वीर सिंह के पास के जाती है
वीर सिंह वैध जी को प्रणाम करते है और सारी बात बताते हैं
वैध जी कहते हैं कि मैं भी आपके साथ चलता हू वीर जी
क्रमशः

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