दरिद्रता केवल धन सम्पत्ति से जुड़ी कोई सामान्य समस्या नहीं हमारे वेदों के अनुसार यह एक अभिशाप है। जिसके घर में दरिद्रता का प्रवेश हो जाता है उस घर में धन की कमी या कर्ज तो एक आम समस्या है ही दरिद्रता एक पुरुष का पुरुषार्थ, उसका मान वैभव, समाजिक प्रतिष्ठा, सेहत यहां तक की आपका एवं आपकी संतान का सौभाग्य भी छीन लेती है।
अक्सर लोग दरिद्रता का अर्थ आर्थिक आभाव समझते हैं किंतु यह इससे कहीं ज्यादा है। दारिद्र्य वो भीषण अभिशाप है जो अगर किसी के कुल में प्रवेश कर जाये तो इस लोक मैं तो व्यक्ति भांति भांति तरह के कष्ट भोगता ही है परलोक भी खराब हो जाता है। ना संतान से सुख मिलता है ना संतान को सुख मिलता है, या तो विवाह नही होता और हो जाये तो किसी ना किसी वजह से दाम्पत्य का सुख भी नसीब नही हो पाता।
जब दरिद्रता जीवन में प्रवेश कर जाती है तो नाते रिस्तेदार क्या घर के पितर और कुल के देवी देवता भी उस व्यक्ति की सहायता नही करते उसका त्याग कर देते हैं।
दरिद्रता का कारण क्या होता है वह किसी घर में या कुल में कैसे प्रवेश कर जाती है, कैसे इससे बचा जा सकता है और अगर दारिद्र्य रुपी अभिशाप आपको लग ही चुका है तो कौन से वो रामबाण उपाय हैं जो आपको इस अभिशाप से मुक्ति दिला सकते हैं, क्यूंकि ये श्राप ऐसा है जो मामूली टोने टोटके, झाड फूंक या छोटे-मोटे फालतू उपायों से ठीक नहीं होने वाला इसके लिये चाहिए भागीरथी प्रयास और साक्षात् ईश्वर की कृपा।
सिर्फ इस एक विषय पर अध्ययन, कठिन साधना और तप तथा अनुभव दो दशक से ज्यादा का है, मेरी सलाह मानिए और बेफिजूल के उपायों और टोटकों से बचिये क्युकी यह आपकी पहले से खराब हालत को और भी खराब कर देंगे पूरा जीवन निकल जायेगा और कुछ नही सुधारने वाला। वैसे दरिद्रता का एक लक्षण यह भी है की वह व्यक्ति की बुद्धि का हरण कर लेती है, अत: आप मुझसे सम्पर्क तभी करेंगे या मेरे बताये रास्ते पर तभी चलेगे जब आप पर भगवान की कृपा दृष्टि पड़ चुकि हो, स्वयं ईश्वर ने आपके जीवन से यह श्राप दूर करने का निर्णय ले लिया हो और आपका अच्छा समय आने वाला होगा।
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