मैं अपनी जिंदगी के कुछ ऐसे पलों को लिखना शुरू करती हू भले ही कोई मेरी आत्मकथा पर उपहास करे
मैंने अपने जीवन की याद पहले भी कभी एक डायरी में लिखी थी जब भी मैं खाली बैठी
सूखी रही
दुखी रही
सोचती थी कि इतने थपेड़ों के बीच मे कितनी महफ़ूज़ रही मेरी जिन्दगी
जिंदगी मे कुछ लोग मिले जिन्होंने मुझे बचाया
मग़र जिंदगी मे कुछ ऐसे भी लोग मिले जिन्होंने मेरी जिन्दगी मे बाधाएँ उत्पन्न की
उनसे जीतने की मैंने कभी भी कोशिश नहीं की
हाँ लेकिन अपना बचाव जरूर किया
उनसे सामना करने की मुझमे हिम्मत नहीं रही फिर भी मैंने पीछे खड़े होकर उनसे मुकाबला किया
कुछ लोग ऐसे भी मिले जिन्होंने मेरी पीड़ा समझी
मगर कुछ लोग एसे भी जीवन मे आए जो मुझे पीड़ा देकर खुशी महसूस करते थे
परंतु मैं भी उनके मनोभावों को समझती थी और उनसे दूर हो जाती थी
मुझे पीड़ा देने वाले अब मुझसे कोसों दूर हो गए
परंतु आज उन्हें भी याद है कि वे मेरे साथ क्या करना चाहते थे और अब उनके साथ क्या हो गया

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