कर्मयोगी मस्तक

गहराई समझकर अपने मन को काबू मे

रखकर जो मेहनत करता है एक एक सीढ़ी चाहकर ही कोई अपने उद्देश्यों मे सफ़ल होता है

 
 
    उदय किसी का भी अचानक…
                   नहीं होता…
    सूर्य भी धीरे – धीरे निकलता है…
             और ऊपर उठता है…

    संसार को वही प्रकाशित कर
                   सकता है…
    जिसके भीतर धैर्य व उत्साहित मन हो

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