कोई काम करते हुए जब कोई बाधा आ जाती है उम्र चाहे कोई भी हो

मंच के सभी आदरणीय को प्रणाम
मेरी नॐ सूर्य देवाय नमः
सूर्य देव का वार है उर्जा का संचार है ।
रवि वार दिन सूर्ये देव का पूज रहा संसार है ।।

सूर्य देव का वार है उर्जा का संचार है ।

सूर्ये देव का रथ चलता है तो जन जीवन चलता है,
पाके ऊष्मा सूर्ये देव की धरा का आँचल खिलता है ।
यही सूर्य का सार है उर्जा का संचार है,
रवि वार दिन सूर्ये देव का पूज रहा संसार है ।।

सूर्य देव का वार है उर्जा का संचार है ।
रवि वार दिन सूर्ये देव का पूज रहा संसार है ।।

प्राहते काल की नर्म लाली माँ सूर्ये देव जब लाते है,
जन जीवन जागृत होता पंशी गुण गुण गाते है ।
धरती का शिंगार है उर्जा का संचार है,
रवि वार दिन सूर्ये देव का पूज रहा संसार है ।।

सूर्य देव का वार है उर्जा का संचार है ।
रवि वार दिन सूर्ये देव का पूज रहा संसार है ।।

सूर्ये देव का जो प्रति दिन पूजन वन्दन करता है,
नियमत करे अश्नान ध्यान जो रवि अभिनंद करता है ।
कटता रोग विकार है उर्जा का संचार है,
उर्जा का संचार है ।।

सूर्य देव का वार है उर्जा का संचार है ।
रवि वार दिन सूर्ये देव का पूज रहा संसार है

मुझे उम्र के जंजीरों में ना बांधो।
हाँ मेरे बाल कुछ सफेद हो गए हैं।
कुछ महीन लकीरों ने मेरे
चेहरे पर जगह ले ली है।
नजर का चश्मा लगाती हूँ।उम्रदराज दिखती हूँ पर
उम्रदराज नहीं बनना चाहती।
हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है।
हर रिश्ते को शिद्दत से जिया है।
उम्र के इस पडाव पर
अब खुद के लिए जीना चाहती हूं।
हां मैं फिर से प्रेम करना चाहती हूँ।
प्रेम में पड़ना चाहती हूँ।
खुद से,
अपनी इच्छाओं से,
अपनी अधूरे ख्वाहिशों में
रंग भरना चाहती हूँ।
उम्र के जंजीरों को काटकर
एक नया आयाम लिखना चाहती हूँ।
मैं आजाद होना चाहती हूँ
हर ढकोसलो से
कुरीतियों से
बंधनों से,
स्त्रीतत्व से
पुरुषतत्व से
मैं खुली हवा में सांस लेना
चाहती हूँ।
एक बार फिर से
माँ का आँचल पकड़कर
मासुमियत को जीना चाहती हूँ।
नंगे पाँव बारिश में भींगकर,

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