जब जीवन का चक्का बंद होता है

कुछ याद नहीं रहता

एक एक नस मे पीड़ा होती है इसके पहले

भूल जाते हैं सब तेरी मेरी

ना कुछ रह जाता है ना कुछ किसी को दे सकते है

शारीर स्थिर हो जाता है

आंख खुलती नहीं

जीभ चलती नहीं

पैर जड़ हो जाते हैं

बुद्धि कुछ कुछ रहती है

कहां गया अपना

क्या हुए सारे सपने

क्या पाया

कुछ पाने की लालसा नहीं

कुछ भी कर सकते नहीं

लूट का बाजार तेजी से चल रहा है

सब लूटना चाहते हैं चक्का बंद होने के बाद

ना कोई अपना ना कोई पराया

आंखे धुँधला गई हैं

मुह बंद हो गया है बस अब कुछ चेतनता बची है कुछ देर मे जाने वाली है

पैरों से शारीर मे शून्यता आ रही है

और ऊपर तक शून्य में हो रहा है पूरा शारीर

अब ऊपर शून्यता आ गई सब शून्य हो गया

कुछ नहीं दिखता

बस सब कुछ सब शांत है

सब शांत है जीवन का चक्का अब बंद हो रहा है

🌹🌹🙏😒

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