झूठ का रहस्य एक दिन सामने आ ही जाता है
झूठा इंसान डर डर के जीता है कि कहीं उसका झूंठ पकडा ना जाए
लेकिन झूठ तब भी लोग बोलते है
झूठ की दीवारें बहुत कमजोर होती हैं जो बहुत जल्द हिल जाती है
झूठ का रहस्य एक दिन सामने आ ही जाता है
झूठा इंसान डर डर के जीता है कि कहीं उसका झूंठ पकडा ना जाए
लेकिन झूठ तब भी लोग बोलते है
झूठ की दीवारें बहुत कमजोर होती हैं जो बहुत जल्द हिल जाती है
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