बागडोर

अपनी तो कोई बागडोर नहीं है

हम दूसरों को अपनी बागडोर सौंप दिया करते हैं कोई अपने शब्दों से दुख पहुंचाये या अपने बर्ताव से दुखी करे

हम दूसरे की याद करके अपना संतुलन खो देते है

कभी रोने लगते हैं

कभी हसने लगते हैं

कभी खुद को कोसने लगते हैं

कभी कभी इस सुन्दर जीवन को

कभी कभी अपनी किस्मत को कोसने लगते है

ये जीवन हमे बहुत ही किस्मत से मिला है

अपनी बागडोर अपने ही हाथ मे रखनी चाहिए

बहुत रो लिए दूसरों के लिए

बहुत सह लिया दूसरों की तानाशाही

अपना सबकुछ अपने ही हाथ मे है

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